नाभिकीय चिकित्‍सा (न्यूक्लियर मेडिसिन)

सफदरजंग अस्‍पताल का नाभिकीय चिकित्‍सा विभाग देश के सबसे पुराने विभागों में से एक है।

नाभिकीय चिकित्‍सा विभाग दिल्ली एनसीआर में एम्स, नई दिल्ली के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत एकमात्र अस्‍पताल है जिसके पास यह अत्याधुनिक सुविधा है। यह इनडोर एवं आउटडोर रोगियों को अत्याधुनिक नैदानिक सुविधाएँ प्रदान करता है।

 

  1. पीईटी-सीटी

  2. डुअल हेड गामा कैमरा (एसपीईसीटी-सीटी)

  3. थायरॉइड अपटेक प्रोब विद वेल काउंटर

 

आम जनता एवं केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य सेवा के लाभार्थियों दोनों को यह सुविधा प्रदान की जाती है।

विभाग वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्‍पताल ज़ोन-1, बेसमेंट-1, एसएसबी ब्लॉक एवं ग्राउंड फ्लोर तथा एच-ब्लॉक में स्थित है।

कार्यालय समय:

प्रात: 9:00 बजे से सायं 4:00 बजे तक (दोपहर के भोजनावकाश सहित) – सोमवार से शुक्रवार

प्रात: 9:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक – शनिवार

सभी राजपत्रित अवकाशों एवं रविवार को बंद

पंजीकरण समय:

प्रात: 9:00 बजे से 11:30 बजे तक – सोमवार से शुक्रवार

प्रात: 9:00 बजे से 11:00 बजे तक – शनिवार

अथवा किसी विशेष निर्देशानुसार


नाभिकीय चिकित्‍सा:

नाभिकीय चिकित्‍सा, चिकित्सा की वह शाखा है जो शरीर में कैंसर के विभिन्न प्रकारों, हृदय रोगों एवं अन्य असामान्यताओं सहित कई बीमारियों के निदान या उपचार के लिए रेडियोधर्मी पदार्थ (विकिरण के बिना सील किए गए स्रोत) की थोड़ी मात्रा का उपयोग करती है। नैदानिक एवं चिकित्सीय प्रक्रियाओं के लिए रोगी को अंग/ऊतक-विशिष्ट यौगिक, जिन्हें रेडियोफार्मास्यूटिकल्स कहा जाता है, दिए जाते हैं। नाभिकीय चिकित्‍सा की इमेजिंग एवं नॉन-इमेजिंग प्रक्रियाएँ शरीर के अंगों की काम करने की स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं। नाभिकीय चिकित्‍सा या रेडियोन्यूक्लाइड इमेजिंग प्रक्रियाएँ अवेध्य एवं सामान्यतः दर्दरहित चिकित्सा परीक्षण हैं, जो चिकित्सकों को बीमारियों के निदान में सहायता करती हैं।

नैदानिक और चिकित्‍सा संबंधी प्रक्रियाओं के लिए मरीज़ को रेडियोफार्मास्यूटिकल्स दी जाती हैं। न्यूक्लियर मेडिसिन इमेजिंग और नॉन-इमेजिंग प्रक्रियाएँ शरीर के अंगों के काम करने की स्थिति के बारे में ज़रूरी जानकारी देते हैं।

रेडियोट्रेसर तकनीक ने रोग को शरीर की संरचना या ऊतक-विज्ञान के स्थान पर शरीर-क्रिया विज्ञान एवं जैव रसायन के आधार पर परिभाषित करना संभव बना दिया है। जहाँ अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन एवं एमआरआई असामान्य संरचना के आधार पर रोग की पहचान करते हैं, वहीं पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पीईटी) एवं सिंगल फोटॉन एमिशन टोमोग्राफी (एसपीईसीटी) इमेजिंग डेटा का त्रि-आयामी पुनर्निर्माण करती है, जिससे कंकाल, मस्तिष्क एवं हृदय में घावों की संवेदनशीलता एवं शारीरिक स्थानीयकरण में वृद्धि होती है। ट्यूमर की स्थानीयकरण संवेदनशीलता भी बढ़ जाती है। नाभिकीय चिकित्‍सा में संरचना के बजाय कार्य एवं रसायन पर बल दिया जाता है।

रेडियोन्यूक्लाइड का उपयोग घातक एवं अघातक स्थितियों के उपचार के लिए भी किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सीय नाभिकीय चिकित्‍सा में अत्यधिक प्रगति हुई है। उपयुक्त रेडियोफार्मास्यूटिकल्स के उपयोग से लक्षित चिकित्सा भी संभव है।

नॉन-इमेजिंग प्रक्रियाएँ, जैसे थायरॉइड अपटेक परीक्षण, भी की जाती हैं।

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  1.  पीईटी-सीटी के बारे में संक्षिप्त विवरण

एसएसबी ब्लॉक के नाभिकीय चिकित्‍सा विभाग में ₹20.6 करोड़ मूल्य की एक नई अत्याधुनिक पीईटी-सीटी प्रणाली (सीमेंस बायोग्राफ एमसीटी 64-स्लाइस) स्थापित की गई है।

 

पीईटी-सीटी कैंसर रोगियों के निदान, पूर्वानुमान, उपचार नियोजन एवं अनुवर्ती कार्रवाई में एक आवश्यक उपकरण बन गया है। विभाग में निम्नलिखित पीईटी-सीटी स्कैन किए जा रहे हैं:

  • विभिन्न ऑन्कोलॉजिकल एवं गैर-ऑन्कोलॉजिकल मामलों के लिए एफडीजी पीईटी-सीटी स्कैन

  • एफडीजी पीईटी-सीटी मायोकार्डियल वायेबिलिटी स्कैन

  • एफडीजी पीईटी-सीटी ब्रेन स्कैन

  • प्रोस्टेट कैंसर के लिए जीए-पीएसएमए स्कैन

  • न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर के लिए जीए-डीओटीएएनओसी स्कैन

  • इंसुलिनोमा के लिए 68जीए-एक्‍सेनडीन स्कैन

  • 68जीए-एफएपीआई स्कैन

 

इसका विशेष नैदानिक महत्व निम्नलिखित के प्रबंधन में है:

  • हॉजकिन लिम्फोमा एवं नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा

  • फेफड़े का कैंसर, न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर (एनईटीएस) एवं प्रोस्टेट कैंसर

  • उन्नत पीईटी इमेजिंग अध्ययन, जिसमें एफडीजी-पीईटी, डोटानोक, एफएपीआई, पीएसएमए एवं अन्य विशेष स्कैन शामिल हैं।

  • मायोकार्डियल वायेबिलिटी

 

यह सुविधा मेडिकल ऑन्कोलॉजी, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, हेमेटोलॉजी, यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी एवं पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी सहित अनेक नैदानिक विभागों को भी सहयोग प्रदान करती है।

कैंसर रोगियों के लिए लू-पीएसएमए और लू-डोटानोक जैसी रेडियोन्यूक्लाइड थेरेपी के प्रशासन से पूर्व पीईटी-सीटी इमेजिंग अनिवार्य है, ताकि सटीक रोगी चयन एवं इष्टतम उपचार नियोजन सुनिश्चित किया जा सके।

ऑन्कोलॉजी के अलावा, पीईटी-सीटी हृदयरोग एवं तंत्रिका विज्ञान में जटिल एवं कठिन-से-निदान की जाने वाली स्थितियों के मूल्यांकन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे अस्‍पताल की व्यापक रोगी देखभाल सेवाएँ और मज़बूत होती हैं।

  1.  डुअल हेड गामा कैमरा (एसपीईसीटी-सीटी) के बारे में संक्षिप्त विवरण

एसएसबी ब्लॉक के नाभिकीय चिकित्‍सा विभाग में ₹7.89 करोड़ मूल्य का एक नया अत्याधुनिक डुअल हेड गामा कैमरा (एनीस्कैन एसपीईसीटी-सीटी सिस्टम, 16-स्लाइस सीटी स्कैन सहित) स्थापित किया गया है। एम्स, नई दिल्ली के बाद वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्‍पताल, केंद्रीय स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत दिल्ली एनसीआर में यह अत्याधुनिक सुविधा रखने वाला एकमात्र अस्‍पताल है।

एसपीईसीटी-सीटी निम्नलिखित के निदान में एक आवश्यक उपकरण बन गया है:

 

  1. जठरांत्रिय तंत्र

  • एचआईडीए स्कैन: पित्त रिसाव, एक्स्ट्राहेपेटिक बिलियरी एट्रेसिया, गॉलब्लैडर इजेक्शन फ्रैक्शन के निदान हेतु।

  • टीसी99एम परटेकनेटेट स्कैन: मेकेल डाइवर्टीकुलम जैसे एक्टोपिक गैस्ट्रिक म्यूकोसा के निदान हेतु।

  • जीआई ब्लीड स्टडी: रुक-रुककर होने वाले जठरांत्रिय रक्तस्राव के स्थान के निदान हेतु।

  • सैलिवरी ग्लैंड सिंटिग्राफी: प्रवाह में अवरोध के निदान हेतु।

     

  1. मूत्रजनन तंत्र

  • डीटीपीए स्कैन: किडनी के जीएफआर, विशेषतः विभेदक जीएफआर एवं पीसीएस से जल-निकासी तथा मूत्र-पथ में अवरोध के स्तर के निदान हेतु।

  • डीएमएसए स्कैन: वृक्क कॉर्टिकल दोष एवं तीव्र/जीर्ण पायलोनेफ्राइटिस के निदान हेतु। एक्टोपिक किडनी की पहचान हेतु।

  • डीआरसीजी अध्ययन: वेसिकोयूरेट्रिक रिफ्लक्स के निदान हेतु।

  • टेस्टिकुलर स्कैन: टेस्टिकुलर टॉर्शन के निदान हेतु।

     

  1. कंकाल तंत्र

  • एमडीपी बोन स्कैन (पूरे शरीर का): कंकालीय मेटास्टेसिस के निदान हेतु।

  • एमडीपी बोन स्कैन (तीन-चरणीय): ऑस्टियोमाइलाइटिस एवं प्रोस्थेसिस के ढीलेपन बनाम संक्रमण के निदान हेतु।

     

  1. अंतःस्रावी विज्ञान

  • थायरॉइड स्कैन: थायरॉइड ग्रंथि में हॉट/कोल्ड नोड्यूल।

  • पैराथायरॉइड स्कैन: पैराथायरॉइड एडेनोमा के निदान एवं उसके स्थान की पहचान हेतु।

     

  1. हृदयरोग

  • मायोकार्डियल परफ्यूज़न स्कैन: तनाव-प्रेरित प्रतिवर्ती परफ्यूज़न दोष एवं बाईं निलय की दीवार की गति असामान्यताओं के निदान हेतु।

  • एमयूजीए स्कैन: बाएँ निलय इजेक्शन फ्रैक्शन के निदान के लिए स्वर्ण मानक परीक्षण।

  • वी/क्‍यू स्कैन: पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज़्म के निदान हेतु।

     

  1. ब्रेन स्कैन (टेक्नीटियम-जीएचए / ईसीडी / एचएमपीएओ सहित): मस्तिष्क परफ्यूज़न असामान्यताओं के निदान हेतु।

 

 

III. नॉन-इमेजिंग डायग्नोस्टिक सुविधाएँ

A. थायरॉइड अपटेक प्रोब विद वेल काउंटर के बारे में संक्षिप्त विवरण

वेल काउंटर सहित थायरॉइड अपटेक सिस्टम का उपयोग निम्नलिखित मामलों में किया जाता है:

  • थायरॉइड विकारों से पीड़ित रोगियों में – ग्रेव्स रोग को विभिन्न थायरॉइडाइटिस से विभेदित करने में।

  • ग्रेव्स रोग के रोगियों के लिए 131-आयोडीन थेरेपी की योजना बनाने में।

  • थायरॉइड कैंसर के रोगियों के लिए उच्च-खुराक 131-आयोडीन थेरेपी की योजना बनाने में।

 

थायरॉइड अपटेक प्रोब विद वेल काउंटर, इन-विवो एवं इन-विट्रो अध्ययनों के लिए उपलब्ध है।

 

B. थेरेपी

विभाग के पास थायरोटॉक्सिकोसिस के रोगियों को रेडियोन्यूक्लाइड थेरेपी प्रदान करने की सुविधा है। अन्य रेडियोन्यूक्लाइड थेरेपी में 32पी से हड्डी के दर्द में सहूसहूलियत शामिल है।

 

  • थायरोटॉक्सिकोसिस के रोगियों को 131-आयोडीन।

  • विभाग निम्नलिखित थेरेपी प्रारंभ करने की उन्नत अवस्था में है:

    • प्रोस्टेट कैंसर के लिए लू-पीएसएमए थेरेपी

      • एनईटी के लिए लू-डोटानोक थेरेपी


भविष्य की कार्य योजना:

1.  द्वितीय पीईटी-सीटी एवं द्वितीय एसपीईसीटी-सीटी (गामा कैमरा) उपकरण की खरीद के लिए निविदा प्रक्रिया वर्तमान में प्रगति पर है।

2.  थायरॉइड कैंसर, न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर (एनईटीएस), प्रोस्टेट कैंसर एवं अन्य ऑन्कोलॉजिकल स्थितियों के रोगियों के लिए नाभिकीय चिकित्‍सा हाई-डोज़ थेरेपी आइसोलेशन वार्ड की स्थापना प्रगति पर है।

Sr. No.NameDesignation
1डॉ. पद्मा ए. नामग्यालएसएजी एवं विभागाध्यक्ष
2डॉ. आर. एस. सेठीआचार्य एवं परामर्शदाता
3डॉ. अदिति खुरानासीएमओ (एनएफएसजी)
4डॉ. दीपा कुमारसह-आचार्य
5डॉ. तेजेश पी. सिंहसहायक आचार्य

तकनीकी कर्मचारी:

सुश्री वैशाली वैश                        विकिरण सुरक्षा अधिकारी

श्री सुरेंद्र कु. शर्मा                        विकिरण सुरक्षा अधिकारी

श्री महेश कुमार                          रेडियोफार्मासिस्ट

सुश्री भारती मौर्या                      लैब तकनीशियन (रेडियोआइसोटोप)

श्री मुकेश कुमार                         लैब तकनीशियन (रेडियोआइसोटोप)

श्री सत्येंद्र कु. पटेल                      लैब तकनीशियन (रेडियोआइसोटोप)

श्री कार्तिक सरोहा                      लैब तकनीशियन (रेडियोआइसोटोप)

सुश्री थांगजम सुरजलता              लैब तकनीशियन (रेडियोआइसोटोप)

 

(दिनांक 15.09.2026 के अनुसार)

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सेमिनार एवं सम्मेलन

1.  एनआईएमएस, हैदराबाद में नाभिकीय चिकित्‍सा चिकित्सकों के लिए 5वीं सीटी कार्यशाला (4–5 अप्रैल 2025) में भागीदारी – डॉ. पद्मा ए. नामग्याल एवं डॉ. आर.एस. सेठी, परामर्शदाता एवं आचार्य द्वारा।

 

2.  30 मई 2025 को स्कोप मीनार, लक्ष्मी नगर, नई दिल्ली में 'नाभिकीय चिकित्‍सा सुविधाओं में विकिरण सुरक्षा पर एईआरबी जागरूकता कार्यक्रम' में भागीदारी – डॉ. पद्मा ए. नामग्याल, एसएजी एवं प्रमुख, सुश्री वैशाली वैश (आरएसओ), श्री सुरेंद्र कुमार शर्मा (आरएसओ), श्री महेश कुमार (रेडियोफार्मासिस्ट), सुश्री भारती मौर्या एवं श्री मुकेश कुमार, लैब तकनीशियन (रेडियोआइसोटोप) द्वारा।

 

3.  अपोलो रेडियोलॉजी इंटरनेशनल अकादमी में नाभिकीय चिकित्‍सा एवं पीईटी-सीटी में मिनी फेलोशिप पूर्ण (3 मई 2025 – 14 जून 2025) – डॉ. पद्मा ए. नामग्याल, एसएजी एवं प्रमुख तथा डॉ. आर.एस. सेठी, परामर्शदाता एवं आचार्य द्वारा।

 

4.  एआईजी हॉस्पिटल्स, हैदराबाद में एसोसिएशन ऑफ नाभिकीय चिकित्‍सा फिजिशियंस ऑफ इंडिया के 23वें वार्षिक सम्मेलन (29–31 अगस्त 2025) में भागीदारी – डॉ. पद्मा ए. नामग्याल, एसएजी एवं प्रमुख द्वारा।

 

5.  वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्‍पताल में आयोजित बीसीएमई कोर्स (2–4 सितंबर 2025) में भागीदारी – डॉ. दीपा कुमार, सह-आचार्य एवं डॉ. तेजेश प्रताप सिंह, सहायक आचार्य द्वारा।

 

6.  एसीटीआरईसी, टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई में 'सीएमई अपडेट इन प्रोस्टेट कैंसर: थेरेनोस्टिक्स पर फोकस' (1–2 नवंबर 2025) में भागीदारी – डॉ. पद्मा ए. नामग्याल, एसएजी एवं प्रमुख तथा डॉ. आर.एस. सेठी, परामर्शदाता एवं आचार्य, नाभिकीय चिकित्‍सा द्वारा।

 

7.  चेन्नई में 17वीं एशिया ओशिआनिया कांग्रेस ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एवं बायोलॉजी तथा सोसाइटी ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन इंडिया के 57वें वार्षिक सम्मेलन (4–7 दिसंबर 2025) में भागीदारी – डॉ. पद्मा ए. नामग्याल, एसएजी एवं प्रमुख, डॉ. आर.एस. सेठी, परामर्शदाता एवं आचार्य, डॉ. अदिति खुराना, सीएमओ (एनएफएसजी), डॉ. दीपा कुमार, सह-आचार्य, नाभिकीय चिकित्‍सा द्वारा।

 

8.  अस्‍पताल प्रबंधन में संपर्क कार्यक्रम (16–20 फरवरी 2026) में भागीदारी – डॉ. दीपा कुमार, सह-आचार्य द्वारा।

 

9.  टाटा मेमोरियल अस्‍पताल, मुंबई में 9वें एनएएमपीआईसीओएन 2026 (28–29 मार्च 2026) में भागीदारी – श्री सुरेंद्र कुमार शर्मा (आरएसओ), सुश्री भारती मौर्या एवं श्री मुकेश कुमार, लैब तकनीशियन (रेडियोआइसोटोप) द्वारा।

शैक्षणिक गतिविधियाँ

1.  डीएचआर-आईसीएमआर के अंतर्गत युवा चिकित्सा संकाय पीएचडी कार्यक्रम 2025 – डॉ. दीपा कुमार, सह-आचार्य द्वारा, विषय: "नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर के रोगियों में टायरोसिन काइनेज इनहिबिटर थेरेपी के प्रति ईजीएफआर म्यूटेशन पहचान एवं उपचार प्रतिक्रिया मूल्यांकन के लिए पूर्व-उपचार एफडीजी पीईटी/सीटी रेडियोमिक्स एवं मेटाबॉलिक विशेषताएँ।"

3.  जीजीएसआईपीयू, नई दिल्ली से संबद्ध नाभिकीय चिकित्‍सा में पीएचडी कार्यक्रम का सफल प्रारंभ।

4.  नाभिकीय चिकित्‍सा में डीएनबी कार्यक्रम अनुमोदन एवं क्रियान्वयन के अंतिम चरण में है।

शिक्षण गतिविधियाँ

  • नियमित शैक्षणिक बैठकें, जर्नल क्लब, निवासियों का शिक्षण एवं प्रशिक्षण।

  • एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के डीएनबी छात्रों को शिक्षण।

  • रेडियोलॉजी विभाग के बी.एससी. एमआईटी छात्रों का शिक्षण एवं प्रशिक्षण।


प्रशिक्षण एवं कार्यशालाएँ

1.  एम्स, नई दिल्ली में नाभिकीय चिकित्‍सा प्रशिक्षण (19 जनवरी 2026 – 19 फरवरी 2026) – डॉ. आर.एस. सेठी, परामर्शदाता एवं आचार्य, नाभिकीय चिकित्‍सा द्वारा।

 

2.  एसीटीआरईसी, टाटा मेमोरियल सेंटर, नवी मुंबई में नाभिकीय चिकित्‍सा प्रशिक्षण (2 मार्च 2026 – 14 मार्च 2026) – डॉ. आर.एस. सेठी, परामर्शदाता एवं आचार्य, नाभिकीय चिकित्‍सा द्वारा।

 

3.  पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में पीईटी-सीटी गाइडेड इंटरवेंशन में अल्पकालिक अवलोकनशीप/प्रशिक्षण (06 अप्रैल 2026 – 11 अप्रैल 2026) – डॉ. आर.एस. सेठी, परामर्शदाता एवं आचार्य, नाभिकीय चिकित्‍सा द्वारा।

 

4.  सफदरजंग अस्‍पताल में बीएमडब्‍ल्‍यू नियम एवं प्रबंधन पर प्रशिक्षण – डॉ. अदिति खुराना, सीएमओ (एनएफएसजी) द्वारा संचालित।

 

5.  29 जनवरी 2026 को आयोजित कायाकल्प मंथन कार्यशाला में भागीदारी – डॉ. अदिति खुराना, सीएमओ (एनएफएसजी) द्वारा।

 

6.  एम्स, नई दिल्ली के नाभिकीय चिकित्‍सा विभाग में अल्पकालिक प्रेक्षकता/प्रशिक्षण – सुश्री वैशाली वैश (आरएसओ), श्री सुरेंद्र कुमार शर्मा (आरएसओ), श्री महेश कुमार (रेडियोफार्मासिस्ट), सुश्री भारती मौर्या एवं श्री मुकेश कुमार, लैब तकनीशियन (रेडियोआइसोटोप) द्वारा।

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